Sunday, December 24, 2017

अधिकार और कर्तव्य .....?

दोस्तों आप सभी को मेरा नमस्कार!!
आइये थोड़ा समय निकाल कर ज्ञान गंगा मे डुबकी लगाईये ..
आज हमारे देश में हमारे ऑनलाइन रिलेशन थोड़े खराब भी होते जा रहे हैं आये दिन सोशल नेटवर्किंग का गलत फायदा उठा कर देश में कुछ एक भयंकर आपदा पैदा करने की साज़िश अंदर ही अंदर मजबूत की जा रही है और सही समय आने पर उसको अंजाम भी दिया जा सकता है?
ये साज़िशे कहिये या मन की एक ऐसी विकृत मानसिकता जो कुछ ही लोगों से निकल कर चिन्गारी के रूप में धीरे-धीरे देश के उन नौजवानों को अपना शिकार बना रही है जिनके पास सोचने समझने की कोई बुद्धि का सही एपलीकेशन उनकी लाइफ़ में डाउनलोड नहीं है।
और इसका असर ये हो रहा है कि और जो देश को बरबाद करने भाईचारा खत्म रिलेशन खत्म करने के खुराफाती साफ्टवेयर ऐसे ऊपर बताये गये लोगो ने रख छोड़ें है वो ऐसे एपलीकेशन जल्दी और ईजी डाउनलोड हो जाते है परंतु ये बरबादी के एपलीकेशन जिंदगी को निगेटिव एनर्जी देके बरबादी की ओर ले जाते हैं।
हम उमीदें ज्यादा रखते हैं हर किसी से और ये उमीदें शुरू होती है मां बाप से और फिर घर के बाकी सदस्यों पड़ोसियों समाज सरकार और अंततः देश के हर नागरिक पर तक पहुंच जाती हैं।
कयोंकि हम अधिकार को ज्यादा महत्वपूर्ण समझते हैं कर्तव्य से ...
हम अपने अधिकारों की मांग करते हैं और उसके लिए कोई भी तरीके इस्तेमाल करते हैं पर हमारे जो कर्तव्य हैं उनको हम नजरअंदाज करते जाते है।
जबकि जिदंगी में सच्चा सुख कर्तव्यो को निभाने में मिलता है ना कि अधिकारों की डिमांड से।
हमारे अपने मां बाप और घर के बाकी सदस्यों के साथ क्या कर्तव्य है क्या ड्यूटी है हमारी उनके प्रति हमारी क्या जिम्मेदारी है अपने परिवार के प्रति हमारी कया सोच होनी चाहिये समाज देश और अन्य लोगों के प्रति कर्तव्य निभाने की इससे हम दूर भागते जा रहें हैं और इसका परिणाम ये होता है कि ऐसे अलगाववादी और देश को बर्बाद करने वाले नफ़रत सिखाने वाले दिलों में दहशतगर्द के बीज पैदा करने वालों की साज़िश का शिकार बन जातें हैं और जो चिन्गारी ऐसे लोगों ने लगा दी दिलो-दिमाग में उसको बुझाना तो छोड़ो चिन्गारी को चिन्गारी समझ पाने की बुद्धि का कुछ अता पता ही नहीं चलता। और उस चिन्गारी का अंजाम जब ना बुझने वाली आग को देखकर ऐसी आग भड़कने का सफल आपरेशन होने और एक थंडी सांस लेकर देश से भागते उन तथाकथित दहशतगर्द देश और मानवता इंसानियत के दुश्मनों को विदेश मे मस्त रहकर और खुद को जेल की सलाखों मे ताउम्र बंद और हर एक से मदद मांगते अपने परिवार के सदस्यों की दुखद फीलिंग जब मिलती है तब वो सारे साफ्टवेयर खुद ही अन इंस्टॉल हो जाते हैं दिलो-दिमाग से तब सिर्फ एक ही एपलीकेशन डाउनलोड होने लगता हैं वो भी बिना नेटवर्क के कि.. काश समझ पाते कि हमारी जिम्मेदारी क्या थी अपने परिवार के प्रति और आज जेल की सलाखों मे बंधे ऐसी ही जिम्मेदारी की जबरदस्त टेंशन अकेले ही उठानी पड़ रही कयोंकि उनका तो सिमकाडै इन्टरनेशनल हो चुका। जिन्होने ये हालात बना दिये।
काश पहले कोई ऐसे ब्लाग या पोस्ट को समझना तो छोड़ो लाईक ही कर देते जो मानवता और इंसानियत का ज्ञान दे रहा था वो भी फुकट !! तो आज जेल की सलाखों से दोस्ती नहीं उन रिश्तों कै साथ रहते उन अपनों के साथ रहते जो आज इसी जेल के बाहर खड़े है कि शायद ऐक झलक दिख जाये हमारी ...
What is our duty ? Think that always ...D'nt think what is our Rights ? अपना ख़याल रखिएगा .....sunEsh mumbai created for unity of human .thank u

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