Wednesday, December 27, 2017

OVER DOZZZ

OVER DOZZZZ ......हैवान शब्द हम सबने सुना है और शैतान शब्द भी सुना है आज आपके साथ शेयर करता हूँ इनके सही मायने जो मेरी समझ मे आए।
  हैवान और शैतान ये दो शब्द कोई गाली नहीं कयोंकि यदि ये महज़ गाली के कैटिगरी मे आते,  तो बहुत बार देखा गया कि हमारे यहाँ कभी क्रोध में या आवेश में आके मां बहिनें भी    किसी गलत काम करने वाले को ये बोल देती हैं कि शैतान हो क्या ? हैवान हो क्या? कभी बड़े बुजुर्ग या किसी अच्छे आचरण वाले के मुंह से भी निकल जाते है ये शब्द उनको हुई किसी पीड़ा के कारण,उसके लिए जिसने उनको पीड़ा पहुंचाई  होगी।
अब आते है हम अपनी खास बात पे क्या है इस पोस्ट मे ऐसा?
यदि अब समझ मे आ गई ये बात कि हैवान और शैतान ये दो शब्द गाली नहीँ कयोंकि इन शब्दों को ऊपर बताये गये लोगो के द्वारा भी इस्तेमाल किया जाता है और ऐसे लोग कभी गाली नहीँ देते मतलब हमारे माता पिता बुजुर्ग और अच्छे आचरण वाले लोग । तो फिर इन शब्दो का इस्तेमाल जो होता है वो क्या है?
तो ये दो शब्द जातिसूचक शब्द है गालीया नहीँ जैसे यदि कोई मुझे कुता गदा सूअर बोल दे तो मुझे कोई तकलीफ़ नहीँ होगी कयोंकि मै उसकी सायकोलाजी का गुलाम नही बनूगा कयोंकि वो ये गाली समझ के दे रहा उसको बस यही समझ है तो मेरी बुद्धि उसकी इस अज्ञान से भरे दिमाग जैसी नहीँ बनेगी कयोंकि मै सत्य जानता हूँ कि कुता गधा और सूअर ये योनिया हैं गालीया नहीँ। 
अब इसमे मै जो कुछ खास कहना चाहता हूँ उस मेरी बात की गाड़ी वहीँ लटका देंगे कुछ लोग और एक नया सवाल पैदा कर देगें कि भाई आप एक मानव हो और यदि आप इनको योनि बता रहे हो तो एक मानव को ऐसी दूसरी योनि जैसे शब्द बोलने पे गुस्सा या तकलीफ़ क्यो नहीं।
इसलिये मै आधी अधूरी बात नहीँ लिखता इसका भी जवाब है और वो ये कि ...
ठीक है कि आज मै मानव हूँ पर जरूरी नही कि अगला जन्म मुझे फिर से मानव का ही मिले कुता गधा और सूअर भी तो बन सकता हूँ ना? कयोंकि ये कुत्ते गधे सूअर चाईना के मटेरियल से नहीं बनते उन्ही 5 तत्वों से बनते है जिन  5 तत्वों से ये सुनेश मुंबई बना है यानि जल अग्नि वायु प्रथवी और आकाश।
तो इसलिये यदि कोई मुझे कुता गधा और सूअर बोलेगा भी तो बेचारा मुझे मेरे ज्ञान को मुझे याद ही तो करवा रहा है ना गालीया कहाँ दे रहा हैं।
अब आते है भाई अपनी उस बात पे जिससे संबंधित ये पोस्ट थी।
अरे सुनेश भाई अभी मुख्य बात और पढ़नी होगी ? जी हाँ ...
तो दोस्तों आगे जो आप लोग पढ़ोगे वही मेरी पोस्ट का महत्वपूर्ण सार हैं आइये आपसे शेयर करता हूँ और ये मेरी अपनी स्वयम की सोच है मेरी सोच से यदि आप भी अपनी सोच से मैच कर रहे हो तो कृपया यहाँ दो शबद लिखे ।
जैसे की आपने अभी तक पढ़ा कि कुता गधा और सूअर गालीया नहीँ योनिया है योनि याने एक जाति के अन्तर्गत आने वाली योनिया जैसे जानवर !! ये एक जाति है और इस जाति के अन्तर्गत आते है ये सब कुत्ते गधे सूअर इत्यादि।
मतलब एक जाति मे बहुत सारी योनिया इन जानवरों की आती हैं।   तो ये तो हो गई एक जाति जानवरों की । कभी-कभी हमने ये सुना है कि जानवर हो क्या? या जानवर की जाति के हो क्या?
मतलब उस योनि के हो क्या? तो ये एक जाति हुई ऐसे ही बहुत जातिया है जानवरों की पक्षियों की राक्षसों की दैत्यों की  कीड़े मकोड़ो की भूत-प्रेतों की इत्यादि।
अब बात करते है उस महत्वपूर्ण जाति की जिसकी उत्पति सिर्फ और सिर्फ उस .*....ईश्वर कहिये खुदा कहिये वाहेगुरु कहिये ईसामसीह कहिये परमेश्वर परमपिता परमात्मा कहिये महाशक्ति रब परवरदिगार या भगवान कहिये निरंकार या अल्लाह  जिन भी शब्दों मे उस शक्ति को उस अनसीन पावर   को कहिये....* असीमित और अदृश्य शक्ति ने उसको याद करने के लिए ही की बस । सिर्फ और सिर्फ इस महत्वपूर्ण जाति को उस ईश्वर के द्वारा सिर्फ उसको खुद को याद करने के लिए ही बनाया गया या पैदा किया गया ...
और आप जानते हो कि वो महत्वपूर्ण जाति नम्बर 1 कोन सी थी? वो थी मानव की इंसान की ये सवश्रेठ जाति में एक गज़ब की बात थी कि.... ईशवर ने अपने द्वारा बनाये तमाम अनगिनत प्रोडक्टो में अनगिनत जातियो मे सिर्फ और बस सिर्फ इसी जाति में कोई योनि नहीँ डाली ...
फिर से पढ़िये  इस लाईन को कि......" इस मानव रूपी इंसान रूपी जाति में बहुत सारी योनिया नहीँ थी । थी तो बस एक ही और वो थी मानव। "  मतलब समझे आप कि मानव जाति और मानव योनि या ये बोलिये इंसान जाति और इंसान योनि।
बाकी अन्य दूसरी सभी तमाम जातियों में बहुत सारी योनिया थी एक एक जाति मे बहुत सारी योनिया थी । नहीँ थी बहुत सारी योनिया तो वो सिर्फ मानव जाति मे नही थी । मानव की एक ही जाति बनाई गई और उस जाति मे एक ही योनि याने मानव । ""इसका मतलब जाति एक योनि एक""
प्यारे मित्रो ..dear friends...
     समझ मे आया कि दिमाग के ऊपर से जा रहा है बाईपास होकर ..हा हा हा हा हा !!
ज्ञान ना आलू टमाटर नहीँ है भाई जो आसानी से मिल जाते है सच्चा ज्ञान या सत्य की ना खोज करनी पड़ती है उस सत्य की खोज जो उस समय करनी जरूरी समझी जाती है  जब बहुत सारे सत्य चिल्ला चिल्ला कर ये कहते हैं कि " मैं ही सत्य हूँ सिर्फ मैं ही सत्य हूँ बाकी सब फालतू और ऐसे चिल्लाने वाले सत्य उस ईश्वर की बनायी  एक जाति या एक योनि के दिलो-दिमाग की घंटी बजा देते हैं उन एक से मानवों एक से इंसानो को अलग-अलग सोचने के लिए मजबूर कर देते है डिसटब कर देते है उसके दिलो-दिमाग को कि वो किस सत्य को आधार मानकर उस परमेश्वर को याद कर सके और उस परमेश्वर की एकमात्र इच्छा कि तुम्हे मैने खुद के लिए बनाया है जिदंगी जीके फिर से मुझ में  ही समा जाना ..
  तो ऐसे इतने सारे तमाम  सत्यों मे से सही और सच्चा वास्तविक सत्य कोन सा है? इसकी खोज करनी पड़ती है।
एक ही जाति को एक ही योनि को जब अलग-अलग जातियो मे बाँट कर दिखाया जाता है महसूस भी करवाया जाता है साइकोलाजी ब्रेनवाश या तमाम फ़ितरतो के द्वारा और तो और आई.डी.तक भी बनवा दी जाती हैं कि तुम इस जाति के हो भाई मेरे तो...
मेरा दिमाग ना सरक गया है अब कि जब अलग-अलग जाति सर्टिफिकेट उन एक जैसे मानवों के दिमाग मे डाल दिए गये ये बताकर कि ये सुविधा के लिए है तो भाईयों अब ये महज़ सुविधा ही रहती तब तक ठीक है लेकिन इस अलग-अलग आई.डी . से सुविधा से ज्यादा मानव का विनाश सामने आ गया है जब अनलाइन मे, मैं देखता हूँ तो ..
एक सा मानव एक ही इंसान एक ही योनि एक ही जाति  बनावट से लेकर जन्म से लेकर मृत्यु तक मानवता इंसानियत रूपी  एक ही विशेषता से परिपूर्ण उस एक ही मानव के डायलाग जब सपने मे भी कभी-कभी मुझे सुनाई देते है ना कि "मैं ये या मै वो" मैं इस जाति का तो मैं उस जाति का तो !! तो घबराहट में गहरी नींद टूट सी जाती है भाईयों जानते हो क्यों कयोंकि मुझे ना ये ऊपर जाने की कनफम टिकट धारीयो की चिन्ता नहीँ होती... वो टिकट धारी  जो इस जातिवाद को आग लगाने की तरह यूस कर रहे हैं ...ऐसों की चिंता नहीँ भाई !! गहरी नींद तो डिस्टर्ब इस लिए होती है कि वो जो बच्चे है मासूम या जो आने वाले होगे इस दुनिया मे और जो अभी है वो मासूम जिनको ये बिलकुल नहीँ पता कि वो चॉकलेट के साथ साथ अपने साथ पढ़ने वाले या साथ घूमने फिरने वाले दोस्तों को भी आगे चलकर चाकलेट के ब्रांड की तरह ना बुलाने लगें  कि सुन ....... ये या वो । सुन इस जाति के ओ तुमको बोल रहा उस जाति के ।
ये सपने में  आई तकलीफ़ मेरी गहरी नींद को जागने के लिए मजबूर कर देती है और जब अब जाग गया तो उनकी नींद डिस्टर्ब करूगा जो एक ही मानव एक ही इंसान को अलग-अलग जाति का समझकर जातिवाद को बढ़ावा दे रहें।
हम एक ही है मानव हमारी एक ही जाति है इंसान की जाति  और हम सभी मानवों  की एक ही विशेषता है मानवता और हमारा एक ही धर्म है इंसानियत । जब मानवता और इंसानियत को नहीं अपना रहे हो ना तो ये समझ लेना कितना भी चिल्ला चिल्ला  कर कहो कि मैं ये मै वो मै इस धर्म का मै उस धर्म का तो मै तो नहीं मानूँगा कयोंकि "कंकाल का मायाजाल "  ये कहता है कि ऐसे लोग जो मानवता और इंसानियत के विरुद्ध है फिर भी चिल्लाते है कि हम मानव है तो उनको उनकी रियल आई.डी .  मरने के बाद  बतायी जाएगी उसी परम शक्ति के खतरनाक किसी सिस्टम के द्वारा कि यहाँ से जो पाठ पढ़के गये थे और वादा भी करके गये थे कि खुद को मानव ही समझूँगा और दूसरों को भी अपनी ही तरह मानव ही तो क्या हुआ उन वादों का? और उस समझ का ? तब जवाब ये दोगे कि मालूम नहीं था माफ कर दो तो भी नही मिलेगी उन गुनाहो  की माफी जो मानवता और इंसानियत के खिलाफ किये गये।     .......कयोंकि एक ही जवाब वहां सुन पायेगे ऐसे मानवता के विरुद्ध काम करने वाले कि ... " कंकाल का मायाजाल " क्यो नही पढ़े थे ।
दोस्तों अपना ख़याल रखिये और अपने परिवार का ।
धन्यवाद शेयर करोगे तो एक मदद ही करोगे उसकी जिसको नहीं मालूम कि जाति हमारी एक ही है मानव की। धर्म हमारा एक मानवता।....sunEsh mumbai created .

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