Monday, January 27, 2020

... कहते है एक मर्द कि सफलता के पीछे एक औरत का हाथ होता है। परन्तु मै अपनी बात को एक जोक्स के साथ पूरी करूंगी कि.. एक मर्द की सफलता के पीछे एक औरत का हाथ तो होता ही है, परन्तु एक मर्द की बरबादी के पीछे बहुत सी औरतों का हाथ होता है, हाहाहा...  !! इससे जाहिर होता है, कि एक औरत,  मर्द के विकास में जितना सहयोगी होती है उतना ही , उसके ईगो याने अहम को यदि ठेस पहुंचे या उसको यदि तकलीफ सहन ना करने योग्य पहुंचे तो वही औरत, उसी मर्द की बरबादी का कारण भी बन सकती है । हिन्दू धर्म में दो दो भावी युद्ध हुए पवित्र महाभारत और  पवित्र रामायण जैसे ग्रन्थ उसके गवाह है एक युद्ध माता सीता के कारण रावण के समस्त साम्राज्य और उसके कुल के नाश का कारण बना तो दूसरी ओर द्रोपदी कोरवो के नाश का कारण बनी ।
एक मर्द कैसे एक औरत के कारण  सफलता की उस चरम सीमा तक आसानी से पहुंच जाता है जिसको उस सफलता को पाने के लिए बिना किसी औरत के साथ के शायद बहुत ज्यादा परिश्रम करना पड़ता आइए आज हम इसपे रोशनी डालते है
  सबसे पहले मै आपको बता दू की कोई भी शक्तिशाली या बलवान या अहंकार से भरा मर्द यदि अपने अहंकारवश ये कहता है कि वो जो कुछ भी  है अपने बलबूते पे है तो ये ना सिर्फ उसका अज्ञान ही हुआ बल्कि ये सोच उस मर्द को अहंकार और अज्ञान से बाहर निकालने ही नहीं देगी क्योंकि आज तक संसार में ऐसा कोई मर्द पैदा नहीं हुआ जो मां की कोख के बिना इस प्रथ्वी पर आया हो।  एक मां याने एक औरत के बिना तो पुरुष के अस्तित्व की बात करना ही सत्य से दूर होना है ।
  कहते है जैसा खाओ अन्न वैसा रहे मन्न तो क्यों कहते है ऐसा क्योंकि अन्न में एक ताकत है एक एनर्जी है जो इंसान को ऊर्जा देती है उसके द्वारा समस्त कामो को करने के लिए!!  और जब एक मर्द अपनी उस ऊर्जा से कोई काम करता है तो उसको ये याद होना चाहिए कि उसकी ऊर्जा के पीछे उसी अन्न की ताकत है जो किसी औरत ने उसके लिए बनाया था जिसको वो खा कर एनर्जी ले रहा है।
 एक औरत वो एक नींव जैसी  है , जिसके बिना मकान ना खड़ा हो सकता है ना बन सकता है और एक औरत, उस जड़ की तरह है जो पेड़ के नीचे तो रहती है लेकिन पेड़  यदि ये समझे  कि वो  जो है वो मै ही  हूं मकान यदि ये समझे बिना नींव के वो जो है  वो बस मै ही हूं तो ये एक अज्ञानता है । ठीक यही बात उन मर्दों के लिए यदि कि  वो औरत के त्याग समर्पण और उनकी सहनशीलता को ठुकराकर ये कहे की जो है बस वही है तो ये एक अज्ञान के सिवा कुछ नहीं और अज्ञान अहंकार को जन्म देता है और अहंकार ना सिर्फ बरबादी बल्कि आत्मशक्ति को भी कम करता है।  इसलिए यदि एक मर्द को  अपनी ज़िन्दगी को समझना है तो उसको पहले औरत को समझना बहुत ज़रूरी है कि एक औरत भोग की एक वस्तु ना होकर एक शक्ति है जिससे भोग भोगने की समस्त वस्तुएं उस मर्द के क़दमों में आ सकती है यदि एक औरत को उसने सम्मान दिया जिसकी वो अधिकारी है  ।
 आपने देखा होगा दुनिया में कोई भी पागल शादी शुदा नहीं होता । पागल आपको कुवारे ही मिलेगे सिंगल man
 शायद औरत नहीं होती तो मर्द आपस में ही एक दूसरे को ख़तम चुके होते ।ये संसार चल ही औरत के कारण रहा है अपना स्वार्थ और औरत में मोह के कारण ये संसार चल रहा । तो यदि ज़िन्दगी खुशनुमा चलानी है तो मंदिरों में जैसे उस देवी के सामने जो कुछ श्रद्धा दिखाई जाती है वैसी ही श्रद्धा एक चलती फिरती घर संभालने वाली औरत की भी हो तो ये मर्द का जीवन  स्वर्ग बन जाएगा । 

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